भुइया के भगवान : छत्तीसगढ़ी कविता

पथरा चिर के पानी ओगराथस,
पटपर परिया म अन उपजाथस।
भुखे रइके सबके पेट भरइया किसान,
मै महिमा गाववं तोर भुइया के भगवान।।

धरती के तही सिंगार करइया,
अगास ल निर्मल हवा देवइया।
चरा-चर जीव जगत के दुलरवा मितान,
मै महिमा गाववं तोर भुइया के भगवान।।


नइ डर्रावथस घाम पानी ले,
पालथस परवार पेट बनि ले।
करम जगाहे खेती म मोर गांव के सियान,
मै महिमा गाववं तोर भुइया के भगवान।।

धियान बिज्ञान के बनगेस ज्ञाता,
जबले जुड़िस अन्नपुर्णा ले नाता।
बिन स्कुल अउ मास्टर के पागे गियान,
मै महिमा गाववं तोर भुइया के भगवान।।

मन म नइहे गरब गुमान,
मेहनत माटी जेकर इमान।
तोर ले ये दुनिया हे सदा राख धियान,
मै महिमा गाववं तोर भुइया के भगवान।।

-  जयंत साहू
डूण्डा - रायपुर छत्तीसगढ़ 492015

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